कोटा। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मौलाना ओबेदुल्ला खान आजमी ने अपने कोटा प्रवास के दौरान समान नागरिक संहिता (UCC) का कड़ा विरोध करते हुए केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारा देश न तो कुरान से चलता है, न गीता से और न ही बाइबिल से; भारत का संचालन पूरी तरह से भारतीय संविधान के तहत होता है। मौलाना आजमी ने जोर देकर कहा कि बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, ताकि बहुसंख्यक समाज उनके धार्मिक और सामाजिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप न कर सके।

यूसीसी सिर्फ एक सुझाव, सरकार इसे राजनीतिक फायदे के लिए जबरन थोपना चाहती है

यूसीसी के मसौदे पर बात करते हुए मौलाना आजमी ने कहा कि सरकार इसे देश भर में लागू करने की बात तो कर रही है, लेकिन अब तक इसका कोई स्पष्ट और पारदर्शी ड्राफ्ट जनता के सामने नहीं रखा गया है। उन्होंने तर्क दिया कि यूसीसी कोई अनिवार्य कानून नहीं बल्कि केवल एक संवैधानिक सुझाव है, जिसे देश पर जबरन थोपने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि असली मुद्दों से ध्यान भटकाने और राजनीतिक लाभ उठाने के लिए इस विषय को बार-बार हवा दी जाती है।

समर्थन करने वाले मुस्लिम संगठन कर रहे गुमराह; महंगाई और बेरोजगारी पर भी घेरा

यूसीसी का समर्थन करने वाले कुछ मुस्लिम गुटों और संगठनों को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि देश के मुस्लिम समाज का वास्तविक और प्रामाणिक प्रतिनिधित्व केवल ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ही करता है। बाकी अन्य छोटे-मोटे संगठन निजी स्वार्थ के लिए समाज को भ्रमित कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने देश में बढ़ती बेलगाम महंगाई और बेरोजगारी को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि आज आम जनता बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन सरकार का पूरा ध्यान सिर्फ गैर-जरूरी विषयों पर केंद्रित है।

सड़क पर नमाज और कांवड़ यात्रा को लेकर उठाए सवाल; दोहरे मानदंड का लगाया आरोप

सड़क पर नमाज पढ़ने पर होने वाली कार्रवाई और कांवड़ यात्रा को लेकर भी मौलाना आजमी ने अपनी बेबाक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश के कानून को सभी समुदायों के लिए एक समान दृष्टिकोण रखना चाहिए। उनका आरोप था कि कांवड़ यात्रा के दौरान देश के कई हिस्सों में लंबे समय के लिए मुख्य सड़कें पूरी तरह बंद कर दी जाती हैं, जिससे आम जनता को भारी असुविधा होती है, लेकिन प्रशासन वहां वैसी सख्ती नहीं दिखाता जैसी अन्य धार्मिक मामलों में दिखाई जाती है। उन्होंने शासन और प्रशासन पर इस मामले में दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।

बिलकिस बानो केस का जिक्र कर मांगा समान न्याय; सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील

अपने संबोधन के अंत में मौलाना आजमी ने बिलकिस बानो प्रकरण का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार देश में समानता की बात करती है, तो सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के समान और त्वरित न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने देश में बढ़ रही वैचारिक और सामाजिक दूरियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समय रहते विभिन्न वर्गों के बीच अविश्वास की खाई को पाटने के लिए संवाद नहीं हुआ, तो इसका खामियाजा पूरे राष्ट्र को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था, संवैधानिक मूल्यों और आपसी भाईचारे को मजबूत बनाए रखने की पुरजोर अपील की।